कोई तो बात होती है !

लहरों से बहने के साथ में
हर लफ़्ज़ से निकली बात में
अँधियारी सी उस रात में
कोई तो बात होती है ।

ख़ामोशी से कह जाने में
कुछ छुपने और छुपाने में
धड़कनों को बहलाने में
कोई तो बात होती है ।

कोई गीत गुनगुनाने में
किसी के याद आने में
आँसुओं के बह जाने में
कोई तो बात होती है ।

कभी दिल को समझाने में
तो कभी बहक सा जाने में
अहसासों को जगाने में
कोई तो बात होती है ।

कोई किस्सा सुनाने में
बीती यादों के खो जाने में
हालातों को सहलाने में
कोई तो बात होती है ।

उन बातों में जान होती है
यूँ ही बस कुछ लम्हों से
अनायास पहचान होती है ।
© दीप्ति शर्मा

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    You write too good!

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    Very well writing!